21/04/2015

जब से उसने...

जब से उसने शहर छोड़ा हर रास्ता सुनसान हुआ,
अपना क्या है सारे शहर का एक जैसा नुकसान हुआ,
ये दिल ये आसेब की नगरी मसकान सोचूँ वहमों का,
सोच रहा हूँ इस नगरी में तू कब से मेहमान हुआ!

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